Akbar Allahabadi Ki Shayari
इश्क़ के इज़हार में हर-चंद रुस्वाई तो है पर करूँ क्या अब तबीअत आप पर आई तो है जो कहा मैं ने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर हँस के कहने लगा और आप को आता क्या है लोग कहते हैं बदलता है ज़माना सब को मर्द वो हैं जो ज़माने को बदल देते हैं नाज़ क्या इस पे जो बदला है ज़माने ने तुम्हें मर्द हैं वो जो ज़माने को बदल देते हैं मोहब्बत का तुम से असर क्या कहूँ नज़र मिल गई दिल धड़कने लगा निगाह-ए-गर्म क्रिसमस में भी रही हम पर हमारे हक़ में दिसम्बर भी माह-ए-जून हुआ Also, Read - Anmol Vachan & Suvichar Achi Baatein FB Shayari Shayari On Life कोट और पतलून जब पहना तो मिस्टर बन गया जब कोई तक़रीर की जलसे में लीडर बन गया हक़ीक़ी और मजाज़ी शायरी में फ़र्क़ ये पाया कि वो जामे से बाहर है ये पाजामे से बाहर है जो वक़्त-ए-ख़त्ना मैं चीख़ा तो नाई ने कहा हँस कर मुसलमानी में ताक़त ख़ून ही बहने से आती है धमका के बोसे लूँगा रुख़-ए-रश्क-ए-माह का चंदा वसूल होता है साहब दबाव से इस क़दर था खटमलों का चारपाई में हुजूम वस्ल का दिल से मिरे अरमान रुख़्सत हो गया हम ऐसी कुल किताबें क़ाबिल-ए-ज़ब्ती समझते हैं कि जिन को पढ़ क...